गर्मियों की छुट्टियाँ थीं
सवेरे का पहला पहर था
धुप अभी नर्म थी
सुनेहरा, दिन का रंग था
याद मुझे है अभ भी
वो आपकी बड़ी सी उँगली
सवेरे का पहला पहर था
धुप अभी नर्म थी
सुनेहरा, दिन का रंग था
याद मुझे है अभ भी
वो आपकी बड़ी सी उँगली
पकड़कर तब
चला मैं जिसे था
सुलाते थे मुझको उठाकर जब आप
कंधे पर तब आपके सर रख कर जब
ओढकर बिछौना आपके हातों का तब
कभी मम्मी कोई लोरी
गाती थी जब
कभी जब कोई कहानी
सुनाते थे आप
याद है मुझे अभ भी
कितनी सुकून की नींद
मुझे आती थी तब
…
…
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